मुकेश पटेल 9644544570
जैतहरी। दो साल से अपनी मेहनत की कमाई के लिए इंतजार कर रहे 14 श्रमिकों को आखिरकार उनका हक मिल गया। संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन (सीटू) की पहल और कानूनी प्रयासों के बाद श्रमिकों की 10 लाख 70 हजार 971 रुपये की बकाया मजदूरी का भुगतान कराया गया। श्रम न्यायालय शहडोल में समझौते के बाद हुए इस भुगतान से श्रमिकों को बड़ी राहत मिली है और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, रुंगटा माइंस, ओडिशा में कार्यरत जमुना प्रसाद राठौर सहित कुल 14 श्रमिकों की मजदूरी लंबे समय से बकाया थी। श्रमिकों को उनकी मेहनत की कमाई नहीं मिलने के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बकाया राशि के भुगतान के लिए संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन (सीटू) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रमिकों के पक्ष में आवाज उठाई और न्याय दिलाने के लिए कानूनी पहल की।
मामले को लेकर श्रम न्यायालय, शहडोल में प्रकरण दायर किया गया। यूनियन के प्रयासों और कानूनी प्रक्रिया के बाद प्रकरण का समझौते के माध्यम से निराकरण हुआ। इसके बाद 14 श्रमिकों को कुल 10,70,971 रुपये की बकाया मजदूरी का भुगतान किया गया।
दो वर्षों से अपनी मेहनत की कमाई के लिए संघर्ष कर रहे श्रमिकों के लिए यह भुगतान बड़ी राहत लेकर आया है। इस प्रकरण से यह भी सामने आया कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास और कानूनी लड़ाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सीटू की पहल से श्रमिकों को उनकी बकाया मजदूरी मिलने पर श्रमिकों और उनके परिजनों ने राहत महसूस की।