अनूपपुर। खेल के मैदान में जीत का जज्बा, आगे बढऩे का जुनून और अपने हुनर को साबित करने की ललक। कुछ इसी उत्साह और उमंग के बीच गुरुवार, 15 अक्टूबर को शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय अनूपपुर के खेल मैदान में जिला स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिलेभर के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे 468 खिलाकडय़ों ने पूरे दमखम के साथ अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में 258 बालक और 210 बालिकाओं ने हिस्सा लिया। 14 वर्ष की मिनी, 17 वर्ष की जूनियर और 19 वर्ष की सीनियर आयु वर्ग के खिलाडय़िों ने सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक मैदान में पसीना बहाया। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाडय़िों को चयन प्रक्रिया के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त सरिता नायक के निर्देशन में संयोजक एसके वाजपेयी के मार्गदर्शन में जिला क्रीडा प्रभारी उपेन्द्र मिश्रा व सहयोगी स्टाप द्वारा आयोजित किया गया। जिला स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता ने जिले के युवा खिलाडिय़ों को अपनी क्षमता पहचानने और आगे बढऩे का अवसर दिया। खिलाडिय़ों के उत्साह और आत्मविश्वास के बीच यही संदेश उभरा कि मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास से मंजिल हासिल की जा सकती है। मैदान में खिलाडिय़ों का संकल्प था
—‘हम होंगे कामयाब।’

गांवों से जिला मुख्यालय तक पहुंची खेल प्रतिभाएं
प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि जिले के दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों से भी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाने पहुंचे। विद्यालय स्तर पर अभ्यास करने वाले इन खिलाडिय़ों के लिए जिला स्तरीय प्रतियोगिता आगे बढऩे का महत्वपूर्ण मंच बनी। मैदान में खिलाडय़िों के बीच मुकाबले के साथ-साथ अपने खेल को बेहतर बनाने और अगले स्तर तक पहुंचने की उम्मीद भी दिखाई दी। खिलाडिय़ों का लक्ष्य केवल प्रतियोगिता में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन के दम पर क्षेत्रीय और राज्य स्तर तक पहुंचना है।
पहली बार जिला स्तरीय मैदान में उतरीं खिलाड़ी

बिजुरी की शिखा सिंह ने बताया कि उन्होंने पहली बार जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। शिक्षक के माध्यम से उन्हें यहां आने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आगे बढऩे के लिए खुद मेहनत करनी होगी। वह पूरे जोश के साथ अभ्यास करेंगी और बेहतर प्रदर्शन कर आगे जाने का प्रयास करेंगी।

लखौरा की दीपाली यादव ने कहा कि अब तक वह विद्यालय में ही खो-खो खेलती थीं। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद संभाग स्तर तक पहुंचने की उम्मीद जगी है। वह पूरी ताकत और मेहनत के साथ खेलते हुए आगे बढऩा चाहती हैं।

वहीं, बेला पिपरिया की लक्ष्मी राठौर ने कहा कि खेल शिक्षक के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। वह खेल के क्षेत्र में आगे बढक़र अपने क्षेत्र और विद्यालय का नाम रोशन करना चाहती हैं।
दूरस्थ अंचलों की बेटियों में भी आगे बढऩे का हौसला

राजेंद्रग्राम के लीला टोला से पहुंची रिंकू देवी ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र से निकलकर जिला मुख्यालय में अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण है। पढ़ाई के साथ खेल में हुनर दिखाने का मौका मिला है, इसलिए वह पूरे मन से खेलते हुए आगे बढऩा चाहती हैं।

लखौरा की दिलेश्वरी करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर अनूपपुर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह दूसरी बार इस तरह की प्रतियोगिता में शामिल हुई हैं। यहां खेलने और आगे बढऩे का अवसर मिलने से वह खुश हैं। उनके मन में आगे की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने का पूरा हौसला है।

सिवरी चंदास की रानी देवी ने बताया कि जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होने से पहले उन्होंने विद्यालय स्तर पर काफी मेहनत की है। अब चयन होने पर संभाग स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। इसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं।

अमरकंटक से पहुंचे खिलाड़ी का लक्ष्य राज्य स्तर
क्रीड़ा परिसर अमरकंटक से करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे पंकज सिंह ने बताया कि वह पहले भी कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। इस बार भी उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है। उनका लक्ष्य क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के साथ राज्य स्तर तक पहुंचना है।

वहीं, कुसुम लता धुर्वे ने कहा कि जिला मुख्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में शामिल होकर उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। उन्होंने पूरे मन से खेलने और इस अनुभव को आगे की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करने का संकल्प जताया।
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NewsDose