भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने प्राधिकरण के सदस्य सचिव हर्षल पंचोली के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव मुख्य सचिव को भेजा है। 20 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में अध्यक्ष ने पर्यावरणीय मामलों की एजेंडा प्रक्रिया, बैठक की कार्यवाही और पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) से संबंधित प्रक्रियाओं में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन को भेजे गए पत्र में अध्यक्ष ने कहा है कि SEIAA की 974वीं और 975वीं बैठकों के लिए एजेंडा 17 अक्टूबर को केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर अपलोड किया गया। आरोप है कि एजेंडा तैयार करने और अपलोड करने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा अध्यक्ष से आवश्यक अनुमोदन भी नहीं लिया गया।
लंबित प्रकरणों को एजेंडा में शामिल करने में मनमानी का आरोप
पत्र के अनुसार, SEIAA में लगभग 500 प्रकरण लंबित हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एजेंडा तैयार करते समय प्रकरणों के कालक्रम (क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर) का पालन नहीं किया गया। कुछ लंबित मामलों को छोड़कर अन्य प्रकरणों को मनमाने तरीके से शामिल किया गया। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 974वीं बैठक के एजेंडा में ऐसे कुछ प्रकरण शामिल किए गए, जो परिवेश पोर्टल के अनुसार SEIAA के बजाय राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) में लंबित थे।
अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि डीम्ड पर्यावरणीय स्वीकृति (Deemed EC) से संबंधित कई प्रकरणों में से केवल एक को एजेंडा में शामिल किया गया, जबकि अन्य मामलों को छोड़ दिया गया। पत्र में भारत सरकार के 4 नवंबर 2008 के कार्यालय ज्ञापन और पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के प्रावधानों का हवाला देते हुए निर्धारित प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया गया है।
एनजीटी के आदेशों की अवहेलना का उल्लेख
पत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के प्रकरण O.A. No. 31/2026 (CZ) में 3 फरवरी 2026 को पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। अध्यक्ष के अनुसार, आदेश में SEIAA की विधिवत स्वीकृति के बिना खनन संबंधी कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताया गया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि आदेश के अनुपालन के लिए संबंधित प्रकरणों को SEIAA के समक्ष विचारार्थ एजेंडा में शामिल करने के अनुरोध के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन W.P. (Civil) No. 689/2025 का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि डीम्ड EC से जुड़े प्रकरणों को एजेंडा में शामिल करने के लिए भी अनुरोध किया गया था, लेकिन आरोप के मुताबिक केवल एक प्रकरण को शामिल किया गया।
बैठक की कार्यवाही अपलोड करने में देरी का आरोप
अध्यक्ष ने पत्र में आरोप लगाया कि SEIAA की बैठकों की कार्यवाही का विवरण (MoM) निर्धारित पांच कार्यदिवस की समय-सीमा में परिवेश पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। पत्र के अनुसार, 8 सितंबर 2026 को हुई 966वीं बैठक की कार्यवाही 1 अक्टूबर को और 18 अगस्त 2026 को हुई 965वीं बैठक की कार्यवाही 5 सितंबर को अपलोड की गई।
पत्र में पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद EC लेटर समय पर जारी नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। अध्यक्ष ने कहा कि इससे आवेदकों को अनावश्यक परेशानी होती है। उन्होंने सदस्य सचिव की भूमिका, कार्यप्रणाली और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता जताई है।
तत्काल निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव से हर्षल पंचोली को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया है। पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, मध्यप्रदेश शासन के पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और SEIAA की सदस्य डॉ. सुनेन्दा सिंह को भी भेजी गई है।
हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों पर सदस्य सचिव हर्षल पंचोली का पक्ष इसमें उपलब्ध नहीं है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और शासन स्तर पर प्रस्ताव पर की जाने वाली कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।