मुकेश पटेल 964454570

 

 

अनूपपुर। छोटे से गांव की पगडंडियों से निकलकर देश की अग्रणी नवरत्न कंपनी में कार्यपालक निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना अपने आप में एक प्रेरणादायी उपलब्धि है। अनूपपुर जिले के ग्राम पंचौंहा में जन्मे एस.पी. राठौर की जीवन यात्रा उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। खपरैल से बने गांव के प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई उनकी शिक्षा की यात्रा आज सफलता के शिखर तक पहुंच चुकी है।

खपरैल के स्कूल से शुरू हुई शिक्षा

 

एस.पी. राठौर की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 5वीं तक ग्राम पंचौंहा के ही खपरैल वाले प्राथमिक विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा 6वीं से 10वीं तक की शिक्षा शासकीय विद्यालय चचाई से प्राप्त की। वर्ष 1989 में उन्होंने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल अनूपपुर से 11वीं-12वीं की शिक्षा पूरी की। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी छोटा नहीं होने दिया।

आर्थिक कठिनाइयों के बीच कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने मध्यप्रदेश की प्रतिष्ठित प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट (PET) परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 1990 में उनका प्रवेश शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बिलासपुर में हुआ, जहां उन्होंने विद्युत अभियांत्रिकी में बी.ई. की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT), भोपाल से एम.टेक. तथा सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से एम.बी.ए. (फाइनेंस) की उपाधि हासिल की।

 

बड़े परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष

 

एस.पी. राठौर संयुक्त बड़े परिवार से आते हैं। उनके दो भाई और दो बहनें हैं। उनके पिता श्री सीता राम राठौर मध्यप्रदेश विद्युत मंडल, चचाई में कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और अन्य जिम्मेदारियां चुनौतीपूर्ण थीं। इसके बावजूद माता-पिता के संस्कार, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं की दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

 

उन्होंने विभिन्न कंपनियों में सेवाएं देने के बाद भारत सरकार की नवरत्न कंपनी NHPC में अपनी पेशेवर यात्रा शुरू की। इससे पहले उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी भी की। निरंतर सीखने, मेहनत और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण के चलते उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया और आज वे NHPC में कार्यपालक निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर पहुंच चुके हैं।

 

सफलता के साथ संस्कारों को भी रखा साथ

 

पेशेवर जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करने के साथ ही श्री राठौर ने पारिवारिक संस्कारों और शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। वर्तमान में उनका परिवार अनूपपुर में निवासरत है। उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्र ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद विश्व की प्रसिद्ध बिग फोर कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल अर्न्स्ट एंड यंग (EY) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं उनकी पुत्री कंप्यूटर इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत है।

उनके छोटे भाई और उनकी पत्नी  पार्वती वाल्मीक राठौर भी सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। श्रीमती राठौर वर्तमान में अनूपपुर जिला पंचायत की उपाध्यक्ष एवं जिला महिला मोर्चा की अध्यक्ष के रूप में सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं।

 

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

 

एस.पी. राठौर की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि संसाधनों की कमी मंजिल की राह में अंतिम बाधा नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और परिस्थितियों से लड़ने का साहस हो तो गांव के साधारण विद्यालय से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था के शीर्ष पद तक पहुंचा जा सकता है।

 

पंचौंहा के खपरैल वाले स्कूल से शुरू हुआ यह सफर आज अनूपपुर की माटी के लिए गौरव का विषय है। उनकी उपलब्धि यह बताती है कि मंजिल बड़े शहरों से नहीं, बल्कि बड़े सपनों और मजबूत इरादों से हासिल होती है।