मुकेश पटेल 9644544570

 

अनूपपुर। द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड, अनूपपुर की अदालत ने आत्माराम सोनी बनाम महेश प्रसाद व अन्य से जुड़े भूमि आधिपत्य एवं निष्पादन वाद में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए प्रकरण को पूर्ण संतुष्टि के साथ समाप्त कर दिया है। मामला ग्राम चकेटी स्थित खसरा क्रमांक 146/2/2 के अंश रकबा 0.25 एकड़ भूमि के कब्जे से संबंधित था।

न्यायालय द्वारा 29 नवंबर 2010 को पारित डिक्री के पालन में आदेशिका वाहक रामबिहारी गुप्ता ने 7 अगस्त 2019 को मौके पर पहुंचकर डिक्रीधारी आत्माराम सोनी को विवादित भूमि का आधिपत्य सौंप दिया था। इसकी रिपोर्ट भी 13 अगस्त 2019 को न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी।

इसके बाद डिक्रीधारी द्वारा पुनः आवेदन प्रस्तुत कर निर्णीतऋणी पक्ष पर भूमि पर कार्य करने से रोकने, जान से मारने की धमकी देने तथा संपत्ति कुर्क करने एवं सिविल कारागार भेजने की मांग की गई।

अदालत ने माना कब्जे की कार्रवाई पूरी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 7 अगस्त 2019 को न्यायालय की प्रक्रिया के तहत कब्जा सौंपने की कार्रवाई पूरी हो चुकी थी। न्यायालय ने संबंधित विधिक दृष्टांत का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय की प्रक्रिया से एक बार डिक्रीधारी को वैध कब्जा प्राप्त हो जाने के बाद उसी डिक्री के संबंध में बार-बार निष्पादन कार्यवाही नहीं की जा सकती।

 

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कब्जा मिलने के बाद यदि कोई नया प्रतिरोध या अलग घटना होती है तो उसके लिए कानून में पृथक कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं, निर्णीतऋणी द्वारा वाद-व्यय की राशि 1,642 रुपये भी न्यायालय में जमा कराई जा चुकी थी।

 

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने डिक्रीधारी के सभी आवेदनों को निरस्त करते हुए निष्पादन प्रकरण को पूर्ण संतुष्टि के साथ समाप्त कर दिया।

प्रकरण समाप्त होने के बाद शिकायतों का आरोप

प्रकरण समाप्त होने के बाद भी संबंधित पक्ष द्वारा कलेक्टर कार्यालय सहित अन्य स्थानों पर बार-बार शिकायतें कर परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि न्यायालय द्वारा मामला समाप्त किए जाने के बावजूद लगातार शिकायतें की जा रही हैं।

 

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि न्यायालयीन प्रकरण समाप्त होने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति बार-बार शिकायत कर प्रशासन को गुमराह करने या दूसरे पक्ष को परेशान करने का प्रयास करता है, तो तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।