पुल अधूरा, रपता बहा.... शॉर्टकट के फेर में डेम पार कर रहे लोग

कलेक्टर ने जोखिमपूर्ण यात्रा से बचने की अपील, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नही होने से मजबूरी में जान जोखिम में डाल रहे लोग

पुल अधूरा, रपता बहा.... शॉर्टकट के फेर में डेम पार कर रहे लोग

पुल अधूरा, रपटा बहा....शॉर्टकट के फेर में डेम पार कर रहे लोग
कलेक्टर ने जोखिमपूर्ण यात्रा से बचने की अपील, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नही होने से मजबूरी में जान जोखिम में डाल रहे लोग

अनूपपुर। जिला मुख्यालय में सामतपुर से हर्री बर्री गांव को जोडऩे वाले मार्ग पर बन रहा पुल तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा है और बारिश के इस मौसम में भी आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति तब है जब कलेक्टर हर्षल पंचोली खुद बरसात में नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार न करने की अपील कर चुके हैं।
3 करोड़ 66 लाख की लागत, तीन साल से अटका काम
लोक निर्माण विभाग (सेतु निगम) के तहत ठेकेदार के माध्यम से बन रहे इस पुल पर 3 करोड़ 66 लाख रुपये खर्च होने हैं। निर्माण कार्य लगभग तीन वर्षों से चल रहा है, लेकिन कभी मजदूरों की कमी तो कभी ठेकेदार की लापरवाही के कारण काम आज तक पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में बारिश के चलते निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है। गर्मी के मौसम में ही जिला प्रशासन और विभाग को कई बार आगाह किया गया था कि बरसात से पहले पुल पूरा न होने पर ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया।
अस्थाई रपटा भी बाढ़ में बहा, अब कोई विकल्प नहीं
तिपान नदी पार कर भगतबांध, सोन मौहरी, हर्री बर्री सहित आधा दर्जन गांवों के सैकड़ों ग्रामीण प्रतिदिन इसी रास्ते जिला मुख्यालय आते-जाते हैं। पुल पूरा न होने पर ग्रामीणों ने खुद पुल के बगल में नदी पार करने के लिए अस्थाई रपटा तैयार किया था, लेकिन बरसात शुरू होने से पहले ही तेज बहाव में वह रपटा पूरी तरह बह गया। अब ग्रामीणों के पास आवागमन का कोई सुरक्षित साधन नहीं बचा है।
डेम पार कर जोखिम भरा सफर
ग्रामीणों को जिला मुख्यालय आने के लिए जैतहरी रोड होकर जाने पर ग्रामीणों को कई किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। इस लंबी दूरी से बचने के लिए ज्यादातर ग्रामीण सामतपुर होते हुए शॉर्टकट अपनाते हैं और तिपान नदी में फिल्टर प्लांट के पास बने डेम के ऊपर से नदी पार करते हैं। बारिश के दिनों में डेम पर तेज बहाव के बावजूद ग्रामीण यही रास्ता अपनाने को विवश हैं, जो किसी भी दिन बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
कलेक्टर हर्षल पंचोली ने वर्षाकाल में नागरिकों से अपील की है कि किसी भी पुल, पुलिया, रपटा या नाले पर तेज बहाव होने की स्थिति में उसे पार करने का प्रयास न करें और जोखिमपूर्ण यात्रा से बचें। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सुरक्षित पुल ही तैयार नहीं हुआ और कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई, तब उनके पास जान जोखिम में डालकर डेम पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग और ठेकेदार ने समय पर निर्माण कार्य पूरा किया होता तो आज उन्हें इस तरह अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती।

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