आमाडांड खदान विस्तार पर ग्रामीणों का विरोध, 6 MTPA की अनुमति रोकने की मांग
पूर्व शर्तें पूरी होने तक पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं देने की मांग
आमाडांड खदान विस्तार पर ग्रामीणों का विरोध, 6 MTPA की अनुमति रोकने की मांग
प्रदूषण, पेयजल, सड़क, पेड़ कटाई और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर 9 बिंदुओं पर जताई आपत्ति, पूर्व शर्तें पूरी होने तक पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं देने की मांग
अनूपपुर। जमुना-कोतमा क्षेत्र की SECL आमाडांड खुली खदान में कोयला उत्पादन क्षमता 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 6 MTPA किए जाने के प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया है। 2 सितंबर को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के संदर्भ में ग्राम कुहका, पोस्ट मलगा निवासी अशोक कुमार त्रिपाठी ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संभाग-शहडोल के क्षेत्रीय अधिकारी को आपत्ति पत्र सौंपते हुए मांग की है कि जब तक पूर्व में किए गए वादे और निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक उत्पादन क्षमता बढ़ाने की पर्यावरणीय अनुमति न दी जाए।
ग्रामीण का आरोप है कि 4 MTPA उत्पादन की पूर्व स्वीकृति के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा SECL को कई निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनमें से अनेक का पालन अब तक नहीं हुआ है। आपत्ति पत्र में कहा गया है कि उत्पादन बढ़ने पर स्थानीय आबादी पर प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव और गंभीर हो सकते हैं।
सड़क पर धूल और परिवहन व्यवस्था पर सवाल
आपत्ति पत्र में कोयला परिवहन के लिए निर्धारित सड़क निर्माण पूरा नहीं होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार खराब परिवहन सड़क के कारण कोयले से निकलने वाली धूल आसपास रहने वाले परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। पत्र में सेलिकोसिस जैसी बीमारी तथा कानों में संक्रमण सहित धूल-धुएं से स्वास्थ्य प्रभावित होने की बात कही गई है। साथ ही सड़कों पर नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था प्रभावी नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
पेड़ कटाई, पुनर्वनीकरण और जल संकट का मुद्दा
ग्रामीण ने खदान क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी उठाया है। आपत्ति पत्र के साथ वर्ष 2023 और 2025 में पेड़ कटाई से संबंधित कलेक्टर के आदेशों की प्रतियां संलग्न की गई हैं। पत्र में आरोप है कि कटे पेड़ों के अनुपात में फलदार एवं वन प्रजातियों के पौधों का पर्याप्त रोपण नहीं किया गया।
वहीं, डंपिंग से जलाशय में मिट्टी भरने और जलभराव क्षमता घटने का भी उल्लेख है। ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
अस्पताल, रेलवे साइडिंग और ओबी डंपिंग भी सवालों के घेरे में
पत्र में करीब 2000 ठेका एवं नियमित कर्मचारियों के बावजूद आमाडांड क्षेत्र में अस्पताल नहीं होने, प्रस्तावित रेलवे साइडिंग, CHP एवं सड़कों का कार्य पूरा नहीं होने तथा डिपार्टमेंटल ओवरबर्डन (O.B.) को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
ग्रामीण ने स्पष्ट मांग की है कि 4 MTPA उत्पादन के दौरान लंबित सभी पर्यावरणीय शर्तों और वायदों की निष्पक्ष जांच के बाद ही 6 MTPA विस्तार पर निर्णय लिया जाए। आधिकारिक दस्तावेजों में भी आमाडांड खुली खदान जमुना-कोतमा क्षेत्र की परियोजना के रूप में दर्ज है।