विकास को मिलेगी नई रफ्तार- कोतमा में अदानी अनूपपुर थर्मल एनर्जी (म.प्र) लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित जलाशय और एनीकट निर्माण का मार्ग हुआ प्रशस्त
जनसुनवाई में उमड़ा जनसैलाब- 10 गांवों के प्रभावित भू-स्वामियों और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर किया समर्थन
विकास को मिलेगी नई रफ्तार- कोतमा में अदानी अनूपपुर थर्मल एनर्जी (म.प्र) लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित जलाशय और एनीकट निर्माण का मार्ग हुआ प्रशस्त
जनसुनवाई में उमड़ा जनसैलाब- 10 गांवों के प्रभावित भू-स्वामियों और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर किया समर्थन
जल संरक्षण और समृद्धि का नया सवेरा: उचित मुआवजे और पारदर्शिता के साथ शुरू होगी ऐतिहासिक परियोजना
अनूपपुर जिले के कोतमा तहसील में जल संरक्षण और क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। क्षेत्र में प्रस्तावित जलाशय (रिजर्वयार) और एनीकट निर्माण को लेकर आयोजित की गई लोक सुनवाई पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई। इस परियोजना से प्रभावित होने वाले सभी 10 गांवों के भू-स्वामियों, स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कंपनी की विकासपरक नीतियों की जमकर सराहना की। ग्रामीणों ने न केवल परियोजना का खुलकर समर्थन किया, बल्कि इसे क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए बेहद जरूरी और दूरदर्शी कदम बताया। उचित मुआवजे के आश्वासन के बाद ग्रामीणों के चेहरे खिले नजर आए।
अनूपपुर के कोतमा तहसील के अंतर्गत आने वाले 10 प्रमुख गांवों—छतई, गुलीडांड, पचखुरा , छूलहा, मैनटोला, पथरौढ़ी, भाटाडांड, चंगेरी, कटकोना और पयारी में इस जलाशय और एनीकट के निर्माण से विकास की एक नई इबारत लिखी जाएगी। इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए कुल 72.73 हेक्टेयर निजी भूमि का अर्जन किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए भूमि स्वामियों की सहमति और आपत्तियों को सुनने के लिए ग्राम मझौली और ग्राम करकोना के पंचायत परिसरों में भव्य लोक सुनवाइयां आयोजित की गईं। यह पूरी वैधानिक प्रक्रिया 'भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013' के कड़े प्रावधानों के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में खासा उत्साह है।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक सुर में जताया भरोसा
इस लोक सुनवाई के दौरान क्षेत्र के लोकप्रिय जिला पंचायत सदस्य रिंकू रामजी मिश्रा ने पूरी मजबूती के साथ परियोजना के पक्ष में अपना मत रखा। उन्होंने इस जलाशय को कोतमा क्षेत्र के भविष्य को बदलने वाला और विकास का एक बड़ा मील का पत्थर करार दिया। उनके साथ ही प्रभावित विभिन्न ग्रामों के सरपंचों, उप-सरपंचों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी कंपनी के इस प्रोजेक्ट की जमकर वकालत की। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से माना कि इस जलाशय और एनीकट के बनने से क्षेत्र के गिरते जलस्तर में बड़ा सुधार होगा। इसके साथ ही कृषि कार्यों के लिए सिंचाई की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर खुशहाली और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पारदर्शी प्रक्रिया संपन्न
इस पूरे सामाजिक समाघात (SIA) अध्ययन और लोक सुनवाई की प्रक्रिया को जिला प्रशासन की प्रत्यक्ष देख-रेख में बेहद निष्पक्ष तरीके से पूरा किया गया। इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई का कुशल संचालन एवं अध्यक्षता कोतमा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सतीश वर्मा और डिप्टी कलेक्टर सुश्री कमलेश पुरी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अधिनियम के नियमों के तहत हर प्रभावित को उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा। प्रशासन की इस संवेदनशीलता और पारदर्शी रवैये के कारण पूरी प्रक्रिया बिना किसी विरोध के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकी, जिसने एक सकारात्मक मिसाल पेश की है।
जल संरक्षण और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
प्रस्तावित जलाशय और एनीकट के निर्माण से केवल सिंचाई की व्यवस्था ही सुदृढ़ नहीं होगी, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण और भूजल स्तर को भी नया जीवन मिलेगा। गर्मियों के दिनों में होने वाली पानी की किल्लत से प्रभावित गांवों को हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे। कंपनी की विकासपरक नीतियों के चलते क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से होगा। यही कारण है कि ग्रामीणों ने अपनी जमीनों को विकास कार्य के लिए सहर्ष देने की सहमति जताई है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
जनसुनवाई में उमड़ी भारी भीड़
ग्राम पंचायत परिसरों में आयोजित इस ऐतिहासिक लोक सुनवाई में भारी संख्या में प्रभावित गांवों के किसान, भू-स्वामी और महिलाएं उपस्थित रहीं। इस दौरान क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकार और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी पक्षों के बीच बेहद सकारात्मक संवाद देखने को मिला, जहां हर किसी ने क्षेत्र के व्यापक हित को सर्वोपरि रखा। आपसी तालमेल, बेहतर समन्वय और प्रशासन के सहयोग के चलते यह जनसुनवाई कोतमा विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है, जिससे अब विकास कार्यों की रफ्तार और तेज होगी।