अफ्रीकी व्यापार, सततता और क्षेत्रीय एकीकरण पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक विमर्श
अफ्रीकी व्यापार, सततता और क्षेत्रीय एकीकरण पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक विमर्श
अफ्रीकी व्यापार, सततता और क्षेत्रीय एकीकरण पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक विमर्श
अनूपपुर। इंडियन रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन (IRSA) एवं मानव विज्ञान अनुसंधान परिषद, जोहान्सबर्ग विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रीका के संयुक्त तत्वावधान में 21 अगस्त 2026 को ‘अफ्रीकी चिंतक: अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत व्यापार और सततता’ विषयक पुस्तक पर ऑनलाइन विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम गूगल मीट के माध्यम से भारतीय समयानुसार दोपहर 12:30 बजे तथा दक्षिण अफ्रीकी समयानुसार सुबह 9 बजे हुआ। पुस्तक का संपादन प्रो. थोक़ोज़ानी सिमेलाने सहित अन्य संपादकों ने किया है।
कार्यक्रम का संचालन मनोरमा कुंतल एवं डॉ. शुभांगी अम्बले ने किया। सत्र का शुभारंभ इंडियन रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विकास कुमार के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने वक्ताओं, विद्वानों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अकादमिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके बाद पुस्तक के संपादक प्रो. थोक़ोज़ानी सिमेलाने ने पुस्तक की विषय-वस्तु एवं रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने समकालीन अफ्रीकी अकादमिक चिंतन, व्यापार और सतत विकास की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए महात्मा गांधी सहित विभिन्न चिंतकों के विचारों के माध्यम से भारत-अफ्रीका अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. सिप्हामांदला ज़ोंडी ने अफ्रीका में क्षेत्रीय एकीकरण और अंतर-अफ्रीकी व्यापार को मजबूत करने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार रखा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, ऊर्जा, डिजिटलीकरण, अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं कृषि जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी और लचीली व्यापार नीतियों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अफ्रीका जलवायु परिवर्तन की चुनौती को हरित औद्योगीकरण के अवसर में बदल सकता है। साथ ही उन्होंने भारत और अफ्रीका के युवा शोधकर्ताओं से आपसी सहयोग बढ़ाने तथा प्रभावी शोध के लिए शोध-सामग्री साझा करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्तव्य के बाद डॉ. डिपू मशिफाने, यूनिवर्सिटी ऑफ वेन्दा ने पुस्तक पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने व्यापार एकीकरण, क्षेत्रीय सहयोग, सततता और विकास के महत्व पर चर्चा की तथा महाद्वीपीय आर्थिक एकीकरण के सामने मौजूद व्यावहारिक एवं संस्थागत चुनौतियों को रेखांकित किया। दूसरे वक्ता लूसऊनगु ने भी पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर अपना विमर्श प्रस्तुत किया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. देव नाथ पाठक ने सामाजिक एवं मानवीय दृष्टिकोण से व्यापार, विकास और सततता के मुद्दों पर विचार रखे। उन्होंने समावेशी विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को समकालीन विकासात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. लोकपा तमांग के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने वक्ताओं, पैनलिस्टों, आयोजकों, सहयोगी संस्थाओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। पुस्तक विमर्श में विभिन्न देशों से 100 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े। कार्यक्रम में आईआरएसए के कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
पुस्तक परिचर्चा ने अफ्रीका में व्यापार, सततता, क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संवाद के लिए प्रभावी मंच प्रदान किया। विभिन्न देशों के विद्वानों की भागीदारी से भारत और अफ्रीका के बीच अकादमिक सहयोग एवं विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा मिली।
Related Stories
अनूपपुर जिले के 15 जलाशयों का किया जा रहा बांध सुरक्षा मूल्यांकन
1 min read · 2 घंटे पहले
जन विश्वास अभियान के तहत जिला पंचायत सीईओ ने अचलपुर और वृंदावन का किया निरीक्षण
1 min read · 2 सप्ताह पहले
सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी 272 करोड़ की यूनिट की सौगात, बदल जाएगी एमपी की सूरत*
1 min read · एक महीने पहले
*सीएम डॉ. मोहन यादव ने की तारीफ, कहा- देश में सर्वश्रेष्ठ बने मध्यप्रदेश पुलिस*
1 min read · एक महीने पहले
मकान नदी पुल पर मौत को दावत! जलमग्न पुल से जान जोखिम में डालकर गुजर रहे लोग, कलेक्टर की चेतावनी बेअसर
1 min read · एक महीने पहले
सीएम डॉ. मोहन ने किसानों से किया संवाद, कहा- उन्नत खेती व पशुपालन से बढ़ाएंगे आपकी आमदनी*
1 min read · 2 महीने पहले