जांच के बाद फिर जैतहरी में डॉ. स्वयंशु दास की पदस्थापना, कार्रवाई के बजाय संरक्षण के आरोप
दो दिन के औचक निरीक्षण, जियो-फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के बाद भी डॉक्टर की वापसी पर उठे सवाल
वीरेंद्र कुमार पांडेय 7987844172
मुकेश पटेल 9644544570
जैतहरी/अनूपपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतहरी में पदस्थ चिकित्सक डॉ. स्वयंशु दास को लेकर पूर्व में सामने आई शिकायतों और समाचार प्रकाशनों के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई जांच अब उनकी पुनः जैतहरी में पदस्थापना के बाद सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी के निर्देश पर संबंधित चिकित्सक के शासकीय निवास का लगातार दो दिनों तक औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान जांच दल द्वारा मौके की जियो-फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी तथा संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए। जांच के बाद विस्तृत प्रतिवेदन भी विभाग को सौंपे जाने की बात कही जा रही है।
इसके बावजूद डॉ. स्वयंशु दास की पुनः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतहरी में पदस्थापना किए जाने से जांच की निष्पक्षता और उसके निष्कर्ष को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं तो उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई? और यदि आरोप जांच में निराधार पाए गए तो विभाग ने जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं किए?
जांच हुई तो कार्रवाई का निष्कर्ष क्या रहा?
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच प्रतिवेदन के निष्कर्ष को लेकर है। जब शिकायतों को गंभीर मानते हुए विभाग ने जांच के आदेश दिए, जांच दल ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया, फोटो-वीडियोग्राफी की और बयान दर्ज किए, तो उस जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या रहा?
जनहित में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि जांच में किन तथ्यों की पुष्टि हुई और किन आरोपों को गलत पाया गया। यदि जांच में कोई अनियमितता नहीं मिली तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि चिकित्सक पर लगाए गए आरोपों को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त हो। वहीं यदि जांच में कार्रवाई योग्य तथ्य पाए गए तो पुनः उसी स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापना का आधार भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
आचरण नियमों में जवाबदेही का प्रावधान
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 में शासकीय सेवकों से पूर्ण सत्यनिष्ठा बनाए रखने, कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने तथा शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय आचरण से बचने की अपेक्षा की गई है। इसी प्रकार कदाचार अथवा दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित है।
ऐसे में सवाल केवल किसी चिकित्सक की पदस्थापना का नहीं, बल्कि विभाग द्वारा कराई गई जांच के बाद अपनाई गई प्रक्रिया और लिए गए निर्णय की पारदर्शिता का भी है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
स्थानीय शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित चिकित्सक के कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अन्य लोगों द्वारा शिकायतें की जाती रही हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। केवल शिकायत या आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। संबंधित चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। यदि विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हुए हैं तो विभाग द्वारा तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट किया जाना उचित होगा।
जांच का आदेश दिया गया तो निष्कर्ष क्या निकला?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच के बाद विभाग ने क्या निर्णय लिया। दो दिनों तक किए गए औचक निरीक्षण, जियो-फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और बयान दर्ज करने के बाद तैयार रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई? क्या संबंधित चिकित्सक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया? क्या जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित हुए अथवा नहीं? यदि आरोप प्रमाणित नहीं हुए तो पुनः जैतहरी में पदस्थापना का आधार क्या रहा?
इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षित है।
स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा मामला
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किसी भी क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा इकाई है। यहां चिकित्सकों की उपस्थिति, ड्यूटी, मरीजों के प्रति व्यवहार और शासकीय संसाधनों के उपयोग से जुड़े नियमों का पालन सीधे जनहित से जुड़ा विषय है।
ऐसे में किसी चिकित्सक के विरुद्ध लगातार शिकायतें सामने आने पर विभाग की जिम्मेदारी है कि निष्पक्ष जांच कराकर उसके आधार पर स्पष्ट और नियमानुसार निर्णय लिया जाए। दूसरी ओर, यदि शिकायतें तथ्यहीन पाई जाती हैं तो संबंधित चिकित्सक को अनावश्यक आरोपों से बचाने के लिए विभाग को जांच का निष्कर्ष भी स्पष्ट करना चाहिए।
फिलहाल डॉ. स्वयंशु दास की पुनः जैतहरी में पदस्थापना के बाद लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर है। दो दिन की जांच के बाद तैयार प्रतिवेदन में क्या निष्कर्ष निकला और उसी के बाद पुनः पदस्थापना का आधार क्या रहा—इन सवालों पर विभाग की स्पष्टता अब जरूरी मानी जा रही है।
Related Stories
लामाटोला भूमिगत खदान की पर्यावरण स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई सफलतापूर्वक सम्पन्न
1 min read · 2 महीने पहले
राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं सतत निगरानी सुनिश्चित करें — कलेक्टर श्री रत्नाकर झा
1 min read · 1 सप्ताह पहले
हाथियों के आतंक पर बिसाहूलाल सिंह ने मुख्यमंत्री से की ठोस कार्रवाई की मांग
1 min read · 1 सप्ताह पहले
ट्रेन में ड्यूटी कर रहे टीटीई का बैग चोरी, जीआरपी ने दर्ज किया मामला
1 min read · 2 सप्ताह पहले
प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर
1 min read · एक महीने पहले
18 घंटे से अधिक बिलासपुर में खड़ी रहने वाली चार ट्रेनों को कोरबा-गेवरा रोड तक बढ़ाने की मांग
1 min read · 2 सप्ताह पहले