अनूपपुर। जिले में खुद को पत्रकार बताकर दुकानदारों, निजी क्लीनिक संचालकों, अधिकारियों और ठेकेदारों पर धौंस जमाने के मामलों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्रकारिता की पहचान का हवाला देकर किसी को डराना, शिकायत की धमकी देना और कथित तौर पर पैसे मांगने का दबाव बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे जिम्मेदार पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है। ऐसा ही एक मामला बुधवार दोपहर अमरकंटक रोड स्थित एक निजी क्लीनिक में सामने आया।
जानकारी के अनुसार, ऋषि सोनी नाम का एक युवक निजी क्लीनिक पहुंचा और मोबाइल से क्लीनिक व उसके संचालक का वीडियो बनाने लगा। आरोप है कि वीडियो बनाते हुए उसने क्लीनिक संचालक से कहा कि वह उसकी शिकायत करेगा। इसके साथ ही कथित तौर पर उसे मैनेज करने यानी पैसे देने का दबाव बनाया और ऐसा नहीं करने पर क्लीनिक बंद करवाने की धमकी दी।
क्लीनिक संचालक ने युवक से पहले उसकी पहचान और वहां आने का कारण पूछा। इस पर युवक ने कथित तौर पर कहा कि जिले के सभी पत्रकार उसे जानते हैं और वह उनके लिए समाचार पहुंचाने का काम करता है। हालांकि, युवक की पहचान और उसके पत्रकार होने की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सामाजिक कार्यकर्ता के पहुंचते ही भागा युवक
क्लीनिक संचालक ने तत्काल फोन के माध्यम से एक सामाजिक कार्यकर्ता को घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता क्लीनिक पहुंचे और युवक से बातचीत करने का प्रयास किया। आरोप है कि चर्चा शुरू होते ही युवक वहां से निकलने लगा और क्लीनिक संचालक को देख लेने तथा क्लीनिक के खिलाफ कार्रवाई करवाने की बात कहते हुए अपने दोपहिया वाहन से चला गया।
पत्रकारिता के नाम पर धौंस जमाना गलत
पत्रकारिता का उद्देश्य जनसमस्याओं को उजागर करना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना और आम लोगों को न्याय दिलाने में मदद करना है। किसी संस्थान की कमियों को उजागर करने के लिए तथ्य जुटाना और संबंधित पक्ष का जवाब लेना पत्रकारिता की प्रक्रिया है, लेकिन शिकायत की धमकी देकर किसी से अनुचित लाभ मांगना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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NewsDose