अनूपपुर। आदिवासी बाहुल्य अनूपपुर जिले में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा समूह बनाकर ऋण वितरण और कथित तौर पर कम अवधि में ब्याज सहित वसूली किए जाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता जीवेन्द्र सिंह ने जिला प्रशासन से जिले में सक्रिय माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।

जीवेन्द्र सिंह ने कहा कि अनूपपुर, जैतहरी, कोतमा और पुष्पराजगढ़ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार निवास करते हैं। जिले में पेसा अधिनियम लागू होने के कारण ग्राम सभाओं की भूमिका और अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितों की रक्षा महत्वपूर्ण है। ऐसे में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा समूह बनाकर ऋण देने और कथित तौर पर मात्र 15 दिनों में ब्याज सहित वसूली किए जाने की प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि 15 दिनों में ऐसा कौन-सा रोजगार या कारोबार संभव है, जिससे गरीब परिवार अपनी आय बढ़ाकर ऋण और ब्याज चुका सकें? यदि कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त समय और आय के अवसर नहीं मिलते, तो परिवार पुराने कर्ज की अदायगी के लिए नया कर्ज लेने को मजबूर हो सकते हैं। इससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ने की आशंका है।

कर्ज के दबाव से पलायन की आशंका

जीवेन्द्र सिंह ने कहा कि कर्ज के बढ़ते बोझ और वसूली के दबाव से आदिवासी एवं गरीब परिवार मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में कई परिवारों को गुजरात, दिल्ली सहित दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए समय रहते आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

ऋण शर्तों और वसूली प्रक्रिया की जांच की मांग

उन्होंने जिला प्रशासन से जिले में सक्रिय माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के पंजीयन, ऋण वितरण की शर्तों, ब्याज दरों और वसूली प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। साथ ही, जहां कानून के तहत ग्राम सभा की सहमति या अनुमोदन आवश्यक हो, वहां संबंधित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाए। अनुचित दबाव, अवैध वसूली अथवा अन्य नियम विरुद्ध गतिविधियां सामने आने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की।

जीवेन्द्र सिंह ने कहा कि आदिवासी और गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। उन्हें ऐसे कर्ज के चक्र में फंसने से बचाना जरूरी है, जिससे उनके परिवार का भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर उचित जांच और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की।